SHORT COURSE ON EARTHQUAKE RESISTANT DESIGN OF STRUCTURES

A short course on Earthquake Resistant Design of Structures is being organized at IIT Kanpur during March 4-9, 2019 under the Indian Technical & Economic Cooperation Programme (ITEC) sponsored by the Ministry of External Affairs (MEA), Govt. of India.

This course is being attended by 23 international participants from 11 countries such as Russia, Argentina, Georgia, Tanzania, Jamaica, Ethiopia, Mauritius, Afghanistan, Sri Lanka, Bhutan, Nepal. Participants who are practicing professionals from these countries.

The objective this short course is to provide basic knowledge of seismic behavior and design of structures and equip you with the tools necessary for analysis and design of civil engineering structures such as buildings and bridges against earthquake load. One important aspect of mitigating the seismic risk is the construction of infrastructure, buildings, bridges, and dams which are earthquake resistant.

The course was opened by Prof. Sudhir Jain, Director, IIT Gandhinagar, who delivered the inaugural talk on Earthquake Safety in India: achievements, challenges, and opportunities.

He emphasized that despite the early gains in developing knowledge of earthquake-resistant construction, India could not continue the momentum. As a result, most of its civil infrastructure is vulnerable as evidenced in past earthquakes. Prof. Jain emphasized that the confined masonry construction is one such building typology suitable for earthquake resistance in the Indian subcontinent. As founder Director of IIT Gandhinagar, he demonstrated the confined masonry construction on a large scale for the student hostels and staff and faculty housing on the new 400-acre campus of the IIT Gandhinagar

 

 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में अर्थक्वेक रसिस्टेन्ट डिजाइन ऑफ स्ट्रक्चर विषय पर अल्पकालिक पाठ्यक्रम

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में दिनांक 4 मार्च से 9 मार्च के दौरान अर्थक्वेक रसिस्टेन्ट डिजाइन ऑफ स्ट्रक्चर विषय पर अल्पकालिक पाठ्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोआपरेशन प्रोग्राम के तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

इस पाठ्यक्रम में रूस, अर्जेन्टाइना, जार्जिया, तंनजानिया, जमैका, इथोपिया, मारीशस, अफगानिस्तान, श्रीलंका, भूटान, नेपाल के 23 छात्र इस पाठ्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

इस पाठ्यक्रम के आयोजन का उद्देश्य भूकंपी लक्षणों तथा संरचनाओं की डिजाइन के बारे में मौलिक ज्ञान प्रदान करना है तथा उन उपकरणों के बारे में जानकारी देना है जो भूकंपरोधी भवनों तथा पुलों जैसे सिविल इंजीनियरिंग संरचनाओं के विश्लेषण एवं अभिकल्प में सहायक साबित होते हैं। भूकंपरोधी अवसंरचनाओं, भवनों, पुलों तथा बाँधों के निर्माण से भूकंप के खतरे से बचा जा सकता है।

इस पाठ्यक्रम का शुभारंभ आईआईटी गाँधीनगर के निदेशक प्रो. सुधीर जैन के द्वारा किया गया। प्रो. जैन ने इस अवसर पर भारत में भूकंप से सुरक्षाः उपलब्धि, चुनौती तथा अवसर नामक विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने बताया कि भारत में भूकंपरोधी संरचनाओं के निर्माण के ज्ञान के प्रचार-प्रसार के बावजूद इस गति बहुत धीमी है। परिणामस्वरूप भारत में अधिकांश सिविल संरचनायें अभी भी भूकंप के प्रति अतिसंवेदनशील हैं। पूर्व के वर्षों में देश में आये भूकंप में इन संरचनाओं की अतिसंवेदनशीलता देखी जा चुकी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में भूकंपसे बचने के लिए सीमित चिनाई संरचनाओं का निर्माण करना जरूरी है और यह उपयुक्त भी है। आईआईटी गाँधीनगर के निदेशक होने के नाते प्रो. जैन ने आईआईटी गाँधीनगर के परिसर में बनाये गये छात्रावासों, संकाय-सदस्यों एवं स्टाफ के आवासीय परिसरों जोकि सीमित चिनाई संरचना के आधार पर बनाये गये हैं, का प्रदर्शन किया।


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